lord ganesha devotees observe vakratunda sankashti chaturthi vrat


हिंदू धर्म में संकष्टी चतु्र्थी का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान गणेश की पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मौके पर विधि-विधान से पूजा और व्रत किया जाता है। वहीं गणपति बप्पा के आशीर्वाद से जीवन में आने वाली परेशानियों का अंत होता है। इस बार 29 अक्टूबर 2026 को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जा रहा है। इस दिन जातक व्रत करते हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। तो आइए जानते हैं वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में…

तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक 29 अक्टूबर की सुबह 01:06 मिनट से चतुर्थी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं 29 अक्टूबर की रात 10:09 मिनट को इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को किया जा रहा है। आज गणेश पूजा का समय शाम 05:38 मिनट से लेकर 06:58 मिनट तक है।

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पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान आदि करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और एक लकड़ी की चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें। फिर गणपति को फूल, दूर्वा, अक्षत और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री आदि अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक, लड्डू या अन्य सात्विक मिठाई का भोग अर्पित करें। गणपति मंत्रों का जाप करें और गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का पाठ करें।

इसके बाद शाम को गणपति बप्पा की आरती करें और घर-परिवार की सुख-शांति व समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें। बता दें कि इस पूजा और व्रत में स्वच्छता, संयम और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गणपति को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। यानी कि वह भक्तों के जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। इस विश्वास के साथ भक्त इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले लोगों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। वहीं गणपति बप्पा से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रार्थना की जाती है।



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