Ahoi Ashtami 2026: रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग में 1 नवंबर को रखा जायेगा अहोई अष्टमी व्रत


सभी जगह दीपावली की तैयारी घरों सहित बाजारों में शुरू हो चुकी है। भारतीय पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस जिन अहोई माता का व्रत रखा जाता है। 1 नवंबर को अहोई अष्टमी व्रत भी रखा जायेगा। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर  के निदेशक  ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अहोई अष्टमी इस साल 1 नवंबर को मनाई जाएगी। अहोई अष्टमी का व्रत माताएं कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि को रखती हैं। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 02:51 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर 01:10 मिनट पर होगा। इस व्रत को कुछ लोग चंद्र दर्शन और कुछ लोग तारों के दर्शन करने के बाद खोलते हैं। अष्टमी तिथि में चंद्र और तारों का दर्शन 1 नवंबर को होगा, इसलिए यह व्रत रविवार 1 नवंबर 2026 को किया जाएगा। भारतीय हिंदू महिलाओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि माताएं अपने बच्चों के दीर्घायु और स्वस्थ रहने के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। संध्या के समय तारों को अर्घ्द देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस बार अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रवि योग-पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और राजयोग में रखा जाएगा।

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अहोई अष्टमी व्रत का महत्व बहुत ही खास माना गया है। इस व्रत को करने से आपकी संतान खुशहाल होने के साथ ही दीर्घायु भी होती हैं। हर प्रकार के रोगों से उनकी रक्षा होता है और स्या ऊं माता बच्चोंर का भाग्य बनाती हैं और उनको हर बुरी नजर से बचाती हैं। इस व्रत को करने से आपके घर में सुख समृद्धि बढ़ती हैं और आपके घर में बच्चेे करियर में खूब तरक्की् करते हैं। यह व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रखा जाता है और बिना अन्न जल ग्रहण तारों को जल अर्पित करने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है।

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ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन व्रत का पारण शाम के समय किया जाता है। पारण करने से पहले माताएं तारों को अर्घ्य देती हैं और अपने घर की संतानों की सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन रखे गए व्रत से बच्चों का जीवन सुखमय, लंबी आयु वाला और स्वस्थ रहता है। इस व्रत का पालन करने से परिवार में खुशहाली और संतानों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

अहोई अष्टमी

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि  कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 02:51 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर 01:10 मिनट पर होगा। इस व्रत को कुछ लोग चंद्र दर्शन और कुछ लोग तारों के दर्शन करने के बाद खोलते हैं। अष्टमी तिथि में चंद्र और तारों का दर्शन 1 नवंबर को होगा, इसलिए यह व्रत रविवार 1 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि  अहोई अष्टमी के लिए पूजा का सर्वोत्तम समय शाम 4:59 बजे से 6:15 बजे तक रहेगा। तारों का दर्शन कर व्रत के पारण का समय शाम को 06:22 मिनट से शुरू हो जाएगा। वहीं, चंद्रोदय का समय रात 11:05 मिनट है। कुछ स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है।

महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अहोई अष्टमी दीवाली से आठ दिन पहले और करवा चौथ के चार दिन बाद आती है। इस दिन माताएं निर्जल व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय महिलाएं अहोई देवी की पूजा-अर्चना करती हैं। कई जगहों पर तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता हैं कि निसंतान महिलाओं द्वारा इस व्रत को करने से माता अहोई के आशीर्वाद से उन्हें भी संतान का सुख प्राप्त होता है।

कौन हैं अहोई माता

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अहोई माता को मां पार्वती का रूप माना जाता है। इन्हें खासतौर पर संतानों की रक्षा और उनकी लंबी उम्र देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा करने से महिलाओं की कुंडली में ऐसे योग बनते हैं, जो बांझपन, गर्भपात, संतान की असमय मृत्यु और दुष्ट संतान से जुड़ी समस्याओं को दूर करते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, अहोई माता का रूप साही (नेवला) के रूप में दर्शाया गया है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक महिला, जो अपने पुत्रों की मां थी, जंगल में मिट्टी खोदते समय गलती से साही के बच्चों को मार देती है। इसके बाद वह महिला देवी से क्षमा याचना करती है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी उसे आशीर्वाद देती हैं कि उसकी संतान सुरक्षित रहेगी। तभी से माताएं अहोई माता की पूजा कर अपनी संतान की दीर्घायु और कल्याण की कामना करती हैं।

– डा. अनीष व्यास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक



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