उत्तराखंड के चमोली जिले में ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए छह लोगों के शव निकालने के प्रयासों में बचाव दलों को शनिवार को दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पैदल गुजरने के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों बताया कि बचाव अभियान रविवार को भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि दुर्घटनास्थल बेहद दूरदराज के इलाके में है और वहां तक बचाव दलों को केवल पैदल ही पहुंचना संभव है। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि बचाव दल पांडुकेश्वर की ओर से दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए घटनास्थल तक पहुंचे और वहां शवों के अवशेषों को सुरक्षित निकालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान को सुरक्षित बनाने के लिए चाईं गांव के आसपास वैकल्पिक रास्तों की भी तलाश की जा रही है।
सेना, जिला प्रशासन, पुलिस, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की संयुक्त टीम ने शनिवार सुबह बचाव अभियान शुरू किया। चमोली जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनास्थल अत्यंत दुर्गम और अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में है जहां शवों को निकटतम सड़क तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है। बचाव कार्य से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि सड़क तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं।
चमोली जिले में बदरीनाथ से कर्नाटक के श्रद्धालुओं को लेकर लौट रहा ‘ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड’ का एक हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर ज्योतिर्मठ के मारवाड़ी में हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार दिल्ली के एक पायलट और बेंगलुरु के पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। बाद में तलाशी अभियान के दौरान सभी छह शव चाई गांव में दुर्घटनास्थल के आसपास मिले।
दुर्घटनास्थल के दुर्गम पहाड़ी इलाके में होने और अंधेरा होने के बाद हिमालयी भालुओं की आवाजाही बढ़ने के कारण सेना की सलाह पर शुक्रवार शाम शवों को निकालने का अभियान रोक दिया गया था। इस बीच, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग पर उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टर में अब सुरक्षा के मद्देनजर एक सह-पायलट का होना अनिवार्य होगा। यह निर्णय देहरादून में नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और यूकाडा के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया जिसमें यह भी तय किया गया कि प्रत्येक उड़ान के बाद पायलट को एक रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें मार्ग के मौसम और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का विवरण होगा।
डीजीसीए और वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की टीम शनिवार को जोशीमठ पहुंचीं और घटना के बारे में स्थानीय लोगों से बातचीत की। डीजीसीए की एक टीम और उत्तराखंड प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को जोशीमठ के पास दुर्घटनास्थल का हवाई सर्वेक्षण भी किया। अधिकारियों ने बताया कि दोनों जांच दल रविवार को यूकाडा के अधिकारियों के साथ चाई गांव के पास दुर्घटनास्थल पर पहुंचेंगे और हादसे की जांच के सिलसिले में जानकारी जुटाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवाददाताओं से कहा कि दुर्घटना की जांच करने और इसके सटीक कारणों का पता लगाने के आदेश दिए गए हैं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि शवों को चमोली जिला मुख्यालय लाया जाएगा और पोस्टमार्टम के बाद देहरादून ले जाया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति कैसे दी गई, जैन ने कहा, “हमने भी एक परामर्श जारी किया था, लेकिन अब यह जांच का विषय है।”
