ज्यादा मुलेठी खाने से बढ़ सकता है High BP, सेहत पर होते हैं 5 गंभीर नुकसान


बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश जरुर परेशान करती है। ऐसे में मुलेठी चबाना बेहद फायदेमंद हो सकती हैं। इसका सेवन करने से गले को आराम मिलता है, लेकिन इसे बार-बार या ज्यादा मात्रा में खाने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

वहीं, ज्यादा मुलेठी खाने से शरीर में ग्लाइसीराइजिन पॉइजनिंग हो जाती है, जो शरीर में नमक, पानी और हार्मोन का पूरा बैलेंस बिगाड़ देती है। इतना ही नहीं, आपको हेल्थ से संबंधित कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-हाई-बीपी, पोटेशियम कम होना और दिल की धड़कन का बिगड़ना।

ज्यादा मुलेठी खाने के 5 बड़े नुकसान

अगर आप गले की खराश दूर करने के लिए ज्यादा मुलेठी का सेवन करते है, तो नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लमेंट्री एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के अनुसार, नुकसानदायक हो सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर बढ़ता है

असल में मुलेठी में ग्लाइसीराइजिन होता है। जिससे शरीर में सोडियम और पानी रुक जाता है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

पोटेशियम कम हो जाता है

अगर आप ज्यादा मुलेठी का सेवन करेंगे, तो शरीर से पोटेशियम बाहर निकल जाता है। इस कारण से आपको थकान, मसल्स में ऐंठन और कमजोरी महसूस होती है।

 प्रेग्नेंसी में न खाएं मुलेठी

दरअसल, प्रेग्नेंसी को दौरान मुलेठी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यह सेफ नहीं है। इससे समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए गर्भावस्था के समय के इसका सेवन न करें।

दिल की धड़कन बिगड़ सकती है

पोटेशियम की कमी और हाई बीपी की वजह से दिल की धड़कन बिगड़ सकती हैं। कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।

हार्मोन पर प्रभाव पड़ता है

अगर आप अधिक मुलेठी का सेवन करते हैं, तो अभी छोड़ दें। मुलेठी के सेवन कोर्टिसोल हार्मोन को ठीक से टूटने नहीं देता, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना और महिलाओं में पीरियड्स गड़बड़ होने की समस्या देखने को मिलती हैं।

गले की खराश में मुलेठी क्यों फायदेमंद हैं?

अपोलो की रिपोर्ट के अनुसार, मुलेठी एक प्राकृतिक एक्सपेक्टोरेंट है, यानी यह कफ को कम करने और खांसी से राहत दिलाने में मदद करती है। जो कि यह सूजन-रोधी गुण भी होते हैं, जो कि गले की जलन को शांत करती है।

गले की खराश से कैसे बचें?

– फ्लू के टीके समय पर जरुर लगवाएं।

– साबुन-पानी या सैनिटाइजर से बार-बार हाथ धोएं।

– खाना, पीने की चीजें या बर्तन शेयर न करें।

– सर्दी-जुकाम वाले लोगों से दूरी बनाएं।

– खुद बीमार होने के बाद दूसरों के संपर्क में आने से बचें, जिससे संक्रमण न फैले।



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