हर महिला के जिंदगी में मेनोपॉज का नेचुरल फेज जरुर आता है। आमतौर पर हर महिला को 45-55 साल के बीच गुजरना पड़ता है। लेकिन, आजकल की लाइफस्टाइल और खानपान के चलते 40 की उम्र में भी मेनोपॉज के लक्षण महसूस होने लगते हैं। इस समय पर महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं। इनका असर उनकी फिजिकली और मेंटल हेल्थ के साथ नींद पर भी पड़ता है।
कई महिलाओं को इस दौरान नींद आने में काफी परेशानी देखने को मिलती है। रात के समय बार-बार नींद खुल जाती है। आखिर क्यों होता है, आइए आपको बताते हैं।
एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना
अक्सर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने लगता है। हार्मोन न केवल महिलाओं की फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह शरीर के तापमान, बोन हेल्थ और नींद को कंट्रोल करने में भी मुख्य भूमिका निभाता है। इसके स्तर में बदलाव होने के कारण कुछ महिलाओं की नींद प्रभावित हो सकती हैं।
रात में अचानक गर्मी महसूस होना
कई बार अचानक से रात में हॉट फ्लैशेज यानी अचानक तेज गर्मी महसूस होना एक आम लक्षण है। इसमें चेहरे, गर्दन और छाती पर गर्मी महसूस हो सकती है। इस दौरान कई महिलाओं को पसीना भी आता है। रात में ऐसा होने पर नींद अचानक खुल जाती है और शरीर को सामान्य महसूस होने के समय लग जाती है। वैसे यह रात में नींद न आने या नींद बार-बार टूटने के कारण हो सकता है।
एंग्जायटी और तनाव
मेनोपॉज के समय हार्मोनल में काफी बदलाव देखने को मिलता है। जिससे तनाव और एंग्जायटी होने लगती है और इसकी वजह से रात में वे ओवरथिंकिंग करना शुरु कर देती है, जिसके चलते कई बार नींद नहीं आती है।
बार-बार यूरिन आना
मेनोपॉज के समय रात में बार-बार यूरिन जाने की जरुरत महसूस होती है। असल में एस्ट्रोजन का लेवल कम होने के चलते यूरिनरी ट्रैक्ट के टिश्यूज पर काफी असर देखने को मिलता है। यूरिन संबंधित सारी दिक्कतें हो सकती हैं। यह नींद टूटने का का एक कारण हो सकता है।
मेनोपॉज में अच्छी नींद के लिए क्या करें?
– अपना सोने और जागने का समय तय करें। रोजाना करीब एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश जरुर करें।
– कमरे को ठंडा रखें, जिससे नींद अच्छी आए। हल्के कपड़े ही पहनें।
– भूलकर भी शाम को चाय और कॉफी न लें।
– सोने से पहले मेडिटेशन जरुर करें।
– अपना स्क्रीन टाइम कम करें।
