स्ट्रोक अचानक से होने वाली गंभीर स्थिति होती है। लेकिन इसके बाद कई जोखिम कारक लाइफस्टाइल और डाइट के तरीकों से कंट्रोल कर सकते हैं। खासकर अनहेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे फैक्टर्स स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए स्ट्रोक से बचाव में सिर्फ दवा नहीं बल्कि आपकी डाइट भी अहम रोल अदा करती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हेल्दी डाइट पैटर्न और कम स्ट्रोक रिस्क के बीच कनेक्शन देखा गया है। स्ट्रोक से बचाव के लिए मेडिटेरेनियन-स्टाइल डाइट को बेहतर माना जाता है।
स्ट्रोक का रिस्क डाइट से कनेक्शन
हमारी डाइट सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रोक के खतरे को प्रभावित कर सकती है। अधिक सोडियम वाला खाना बीपी को बढ़ा सकता है। जबकि फल, सब्जियां, नट्स और साबुत अनाज जैसे फूड्स में मैग्नीशियम, पोटैशियम, फाइबर और अनसैचुरेटेड फैट जैसे पोषक तत्व देते हैं। हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का एक प्रमुख मॉडिफाइड रिस्क फैक्टर है। बीपी को कंट्रोल करने के लिए सोडियम कम करना, हेल्दी ईटिंग पैटर्न, पोटैशियम-रिच फूड्स बढ़ाना और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी जैसी लाइफस्टाइल को फॉलो करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: Tea के साथ भूलकर भी न खाएं ये 5 Snacks, पाचन तंत्र पर पड़ेगा बुरा असर
हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल स्ट्रोक का खतरा
हाई बीपी वेसल्स पर लगातार प्रेशर डालता है। लंबे समय तक अनकंट्रोल्ड हाइपरटेंशन रहने से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
दूसरी ओर खासतौर पर बढ़ा हुआ अनहेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल आर्टरीज में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक बनने की प्रक्रिया से जुड़ा है। इससे ब्लड वेसल्स में सिकुड़न हो सकती है। साथ ही इससे ब्लड फ्लो भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऐसी डाइट लेनी चाहिए, जो कोलेस्ट्रॉल, बीपी, ब्लड शुगर और बॉडी वेट जैसे कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स को मैनेज करने में सहायता करे।
स्ट्रोक से बचाव के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें
पत्तेदार हरी सब्जियां करें शामिल
मेथी, सरसों का साग, पालक, केला और अन्य गहरे हरे पत्तेदार सब्जियों को डाइट में शामिल करना चाहिए। इनमें पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर, फोलेट और विटामिन के जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पोटेशियम युक्त हेल्दी डाइट सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। वहीं यह बीपी को मैनेज करने में भी मदद करता है।
डाइट में शामिल करें फाइबर युक्त फल
ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी जैसे जामुनों में पॉलीफेनोल यौगिक और फाइबर पाया जाता है। भारत में सेब, संतरा, पपीता, नाशपाती, अमरूद और अन्य साबुत फल भी अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं। फलों के जूस की जगह साबुत खाना ज्यादा बेहतर होता है। क्योंकि साबुत फलों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। मेडिटेरियन डाइट पर हुई व्यवस्थित समीक्षाओं में सब्जियों और फलों सहित पौधे से युक्त डाइट लेने से हृदय रोगों और स्ट्रोक के जोखिम कम होता है।
साबुत अनाज
सफेद ब्रेड और प्रोसेस्ड अनाज की जगह ब्राउन राइस, जई, जौ, ओट्स, क्विनोआ, दलिया और अन्य साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज में फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं फाइबर कोलेस्ट्रॉल मैनेज और संपूर्ण कार्डियोमेटाबोलिक सेहत के लिए उपयोगी डाइट मानी जाती है।
मेवे और सीड्स
मूंगफली, बादाम, चिया सीड्स, पिस्ता और अलसी जैसे मेवे और सीड्स में फाइबर, अनसैचुरेटेड फैट, मैग्नीशियम और प्लांट बेस्ट पोषक तत्व पाए जाते हैं। नट्स को डाइट में शामिल करने से दिल की सेहत अच्छी होती है। आप नट्स और जैतून के तेल को भी इसमें शामिल कर सकती हैं।
फैटी फिश और हेल्दी प्रोटीन लें
सार्डिन, मैकेरल, सैल्मन जैसे फैटी फिश में ओमेगा -3 फैटी एसिड पाया जाता है। वहीं मछली को हृदय-स्वस्थ डाइटरी पैटर्न का हिस्सा माना जाता है। हेल्दी प्रोटीन स्त्रोतों के रूप में समुद्री भोजन और मछली जैसे प्लांट बेस्ड प्रोटीन सोर्स को लिया जा सकता है। हालांकि अगर आप शाहाकारी हैं, तो आप डाइट में राजमा, सोया, चना, दाल, टोफू, फलियां, अनसाल्टेड बीज और मेवे जैसे ऑप्शन को शामिल कर सकते हैं।
स्ट्रोक की रोकथाम के लिए डाइट में साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, साबुत अनाज, फैटी फिश और बीज आदि हेल्दी प्रोटीन सोर्स हैं। जोकि हृदय की सेहत के लिए काफी जरूरी भोजन हो सकता है। इन फूड्स में पोटेशियम, विटामिन, मैग्नीशियम, फाइबर, मिनरल्स और अनप्रोसेस फैट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन इनका फायदा सिर्फ एक बार के भोजन के फौरन बाद नहीं दिखता है, बल्कि इसको लंबे समय तक डाइट में शामिल करने से फायदा नजर आता है।
