हिंदू धर्म में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य देव को सेहत, ऊर्जा और जीवन का आधार माना जाता है। वहीं आज यानी की 01 नवंबर 2026 को भानु सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन भगवान सूर्य देव की विधिविधान से पूजा-अर्चना करने और व्रत करने से जातक के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है और जीवन में आने वाली परेशानियों का भी अंत होता है। तो आइए जानते हैं भानु सप्तमी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में…
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 31 अक्टूबर 2026 को शाम 04:57 मिनट पर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 01 नवंबर 2026 की दोपहर 02:51 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 01 नवंबर 2026 को भानु सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 06:06 मिनट से लेकर सुबह 08:20 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 मिनट से दोपहर 12:27 मिनट तक रहेगा।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर व्रत का संकल्प लें और तांबे के लोटे में जल लें और इसमें रोली, लाल फूल और गुड़ मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। फिर अपनी सामर्थ्य के हिसाब से तिल, गेहूं और तांबे के बर्तन का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक महत्व
भानु सप्तमी को रवि सप्तमी और रथ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो भानु सप्तमी का विशेष संयोग बनता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा, व्रत और अर्घ्य देने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की विधिविधान से पूजा करने से जातक को आरोग्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और दान-पुण्य करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। वहीं नौकरी और व्यापार में तरक्की के साथ-साथ परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
