gautam gambhir reflects on two year tenure as india head coach


वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ तीन वनडे और पांच T20I मैचों के साथ टीम इंडिया एक लंबे लेकिन ज़बरदस्त घरेलू सीज़न की शुरुआत करने जा रही है। ऐसे में हेड कोच गौतम गंभीर ने अपने दो साल के कार्यकाल पर बात करते हुए टेस्ट, वनडे और T20 क्रिकेट में मिली सफलताओं और नाकामियों, दोनों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उतार-चढ़ाव आते रहे और इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय टीम की कमान संभालने की ज़िम्मेदारी के तहत वह अपनी कामयाबियों और नाकामियों, दोनों को स्वीकार करते हैं।

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भारत और वेस्टइंडीज के बीच 2026 की व्हाइट-बॉल सीरीज़ 27 सितंबर से शुरू होगी, जिसमें भारत के अलग-अलग वेन्यू पर तीन वनडे और पांच टी20 मैच खेले जाएंगे। वनडे सीरीज़ में शुभमन गिल भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि श्रेयस अय्यर टी20 टीम की कमान संभालेंगे। वेस्टइंडीज की कप्तानी शाई होप करेंगे। गंभीर ने JioStar पर कहा कि ये दो साल पलक झपकते ही नहीं गुज़रे। मुझे लगता है कि मैंने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। मैंने अपनी नाकामियां और कामयाबियां भी देखी हैं। लेकिन मेरा हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि जब आप ऐसी ज़िम्मेदारी लेते हैं, तो उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं। तो, चाहे टेस्ट क्रिकेट हो, वनडे क्रिकेट हो या T20 क्रिकेट, हां, मुझे कामयाबी मिली है, जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा, लेकिन मुझे नाकामियों का भी सामना करना पड़ा है। और मैं उन्हें भी खुशी-खुशी स्वीकार करता हूं।

गंभीर ने यह भी बताया कि कैसे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के साथ उनका कामकाजी रिश्ता समय के साथ बदला है। गंभीर ने कहा कि शर्मा के साथ उनका रिश्ता कोच और कप्तान की भूमिकाओं से कहीं आगे का है; यह रिश्ता तब से है जब वे टीम के साथी खिलाड़ी हुआ करते थे। उन्होंने उनके बीच की आपसी समझ पर ज़ोर दिया और कहा कि भले ही कभी-कभी उनकी राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन उनके फ़ैसले हमेशा भारतीय टीम के फ़ायदे को ध्यान में रखकर ही लिए जाते हैं। गंभीर ने आगे कहा कि टीम को सबसे ऊपर रखने का यही नज़रिया उन चारों कप्तानों के साथ उनके काम करने के तरीके का आधार रहा है, जिनके साथ उन्होंने काम किया है।

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उन्होंने कहा कि रोहित और मेरा रिश्ता सिर्फ़ कप्तान और कोच का नहीं था। जब रोहित टीम में आए थे, तब मैं एक सीनियर खिलाड़ी था, इसलिए हमारा रिश्ता तभी से है। रोहित मुझे तब से जानते हैं। जब आप साथ खेलते हैं, तो चीज़ें बहुत आसान हो जाती हैं। असल में, वह मेरी सोच जानते हैं और मैं उनकी सोच जानता हूँ। हो सकता है कि कल मेरी सोच कुछ और हो और कप्तान की सोच कुछ और हो, लेकिन आख़िरकार, जो टीम के हित में हो, अगर वही फ़ाइनल फ़ैसला होता है, तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। और इसीलिए मैंने कहा कि जिन चारों कप्तानों के साथ मैंने काम किया है, उनके साथ मेरा अनुभव यही रहा है कि सभी का फ़ोकस भारतीय क्रिकेट पर ही रहा है।



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