Germany की कंपनियां भारत को बना रहीं Manufacturing और R&D हब, बोले Piyush Goyal


 केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जर्मनी की कंपनियां तेजी से भारत को एक प्रमुख उपभोक्ता बाजार के साथ-साथ विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और नवाचार के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देख रही हैं। गोयल ने यहां अपनी दो दिवसीय यात्रा समाप्त करने के बाद मीडिया से कहा कि उन्होंने सीमेंस हेल्थकेयर, बर्टेल्समैन इन्वेस्टमेंट, फॉक्सवैगन और स्कोडा सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।

 उन्होंने कहा, सभी सीईओ ने एक ही बात कही – जर्मनी की कंपनियां अब भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं देखती हैं, बल्कि अपने साझीदार, विनिर्माण के आधार, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार के केंद्र के रूप में देखती हैं।

 इस समय जर्मनी की लगभग 2,000 कंपनियों का भारत में परिचालन है। मंत्री दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध न केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के द्वार खोलते हैं, बल्कि प्रतिभा, नवाचार, सह-सृजन, सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-विनिर्माण के द्वार भी खोलते हैं।

 गोयल ने कहा, आज जर्मनी के उद्योग के सामने सबसे बड़ी अनिवार्यता लागत में कटौती करना और वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनना है। इसलिए, वे भारत में बहुत बड़े पैमाने पर विनिर्माण की संभावनाएं देख रहे हैं।

 जहां तक उनके नवाचार और डिजाइन कार्य का सवाल है, लगभग हर कंपनी मुझे मौजूदा केंद्रों, जीसीसी (वैश्विक क्षमता केंद्रों) के बारे में बड़े पैमाने पर बताती है, जहां वे लाखों प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार देते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश हरित हाइड्रोजन, वित्तीय सहायता और अपनी हरित पहलों जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझीदारी करना चाहते हैं।



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