भारत में हवाई सफर करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यात्रियों की जरूरत पूरी करने और विदेशों के लिए सीधी उड़ानों की सुविधा बढ़ाने के लिए देश में 3 बड़ी राष्ट्रीय विमानन कंपनियां होनी चाहिए। यह कहना है अडानी एयरपोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण बंसल का। मंगलवार को उन्होंने कहा कि भारत को अपने घरेलू विमानन कारोबार को मजबूत करने पर पहले ध्यान देना चाहिए। इसके बाद ही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बाजार को ज्यादा खोलने पर विचार करना चाहिए।
अरुण बंसल के मुताबिक, इंडिगो और एयर इंडिया को देश की राष्ट्रीय विमानन कंपनियों में गिना जा सकता है, लेकिन इनके बराबर आकार की एक तीसरी बड़ी कंपनी की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े बाजार में केवल 2 बड़ी विमानन कंपनियों के सहारे भविष्य की मांग पूरी करना आसान नहीं होगा। देश को ऐसी कंपनियां चाहिए, जिनके पास पर्याप्त विमान हों और जो दुनिया के दूसरे बड़े विमानन समूहों की तरह सेवाएं दे सकें।
बंसल ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बाजार खोलने की नीति पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि भारत को पहले अपनी विमानन कंपनियों को मजबूत करने का मौका देना चाहिए। जब तक घरेलू कंपनियां विमानों की संख्या, सेवाओं और कारोबार के आकार के मामले में वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने की स्थिति में नहीं पहुंचतीं, तब तक विदेशी कंपनियों के लिए बाजार को बड़े पैमाने पर खोलने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने से पहले भारतीय विमानन कंपनियों के हितों की रक्षा जरूरी है।
बता दें कि भारत का विमानन बाजार दुनिया के तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। बंसल के अनुमान के मुताबिक, देश में हवाई यात्रियों की सालाना संख्या अभी करीब 300 मिलियन है, जो 2040 से 2045 के बीच बढ़कर 1.1 से 1.2 अरब तक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को सुविधा देने के लिए नए विमानों की जरूरत होगी। इसके साथ ही हवाई अड्डों की क्षमता बढ़ानी होगी और नियमों में भी जरूरी बदलाव करने होंगे।
उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत के कई यात्री यूरोप और अमेरिका जाने के लिए पश्चिम एशिया के बड़े हवाई अड्डों का सहारा लेते हैं। दुबई और दोहा जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों के जरिए उन्हें आगे की उड़ान मिलती है। अगर भारत को दूसरे देशों के लिए सीधी उड़ानों का बड़ा केंद्र बनना है, तो घरेलू विमानन कंपनियों को अपने बेड़े का विस्तार करना होगा। साथ ही हवाई अड्डों पर यात्रियों को संभालने की क्षमता और उड़ानों की व्यवस्था भी बेहतर करनी होगी।
इसी बीच अडानी एयरपोर्ट्स ने अगले 7 साल में भारत में 10 से 11 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है। यह रकम हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे, गैर-विमानन कारोबार और हवाई अड्डों के आसपास शहर से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। कंपनी के हवाई अड्डों से फिलहाल हर साल करीब 100 मिलियन यात्री सफर करते हैं। अगले 10 साल में इस संख्या को बढ़ाकर 300 मिलियन करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि कंपनी सरकार की अगली हवाई अड्डा निजीकरण प्रक्रिया में भी हिस्सा लेने की तैयारी कर रही है। इस चरण में 11 हवाई अड्डों को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना है। बंसल ने बताया कि नवी मुंबई हवाई अड्डे के दूसरे चरण का काम तेज किया जा रहा है। इसकी योजना 2030 तक सालाना 50 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने की है।
मुंबई के मौजूदा हवाई अड्डे पर टर्मिनल 1 का नए सिरे से विकास किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर दोनों टर्मिनलों की कुल क्षमता 55 मिलियन से बढ़कर करीब 65 मिलियन यात्री सालाना हो जाएगी। बंसल ने कहा कि कंपनी का मुख्य ध्यान भारत में विस्तार पर रहेगा। विदेशों में निवेश तभी किया जाएगा, जब कोई बहुत अच्छा अवसर सामने आएगा।
