सरकार ने घरेलू कपड़ा क्षेत्र में कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कपास आयात पर सीमा शुल्क छूट दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 तक कर दी है। इस विस्तार की अधिसूचना वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 30 अक्टूबर को जारी की। मई में कपास आयात को पांच महीने यानी 31 अक्टूबर, 2026 तक के लिए सीमा शुल्क से छूट दी गयी थी।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “इस विस्तार से कपड़ा और परिधान क्षेत्र में उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है। इससे कपड़ा बनाने वाली कंपनियों और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। साथ ही घरेलू किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया है।”
मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से बाजार में कपास की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी जिससे घरेलू कपड़ा उद्योग, विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
कपड़ा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत सरकार संपूर्ण कपास और कपड़ा मूल्य शृंखला के स्थायी और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देते हुए, घरेलू कपास किसानों के हितों के साथ कपड़ा उद्योग की जरूरतों को संतुलित करने के लिए सचेत है। मंत्रालय ने आगे कहा कि इस फैसले का मकसद घरेलू कपड़ा क्षेत्र के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाना, प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास की उपलब्धता सुनिश्चित करना, घरेलू विनिर्माण का समर्थन करना और कपड़ा तथा परिधान मूल्य शृंखला में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखने वाले भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।
सीआईटीआई के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा, इस उपाय की तत्काल जरूरत थी, क्योंकि भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र लगातार वैश्विक बाधाओं और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। उद्योग की आवश्यकताओं के मुकाबले घरेलू कपास की आपूर्ति पर्याप्त नहीं थी, जिसके चलते यह चुनौती और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कपास आयात शुल्क छूट को बढ़ाने से भारतीय कपड़ा और परिधान कंपनियां निर्यात अनुबंधों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी।
